एचआईवी का इतिहास जानवरों से शुरू होता है। 19वीं सदी में सबसे पहले अफ्रीका के खास प्रजाति के बंदरों में एड्स का वायरस मिला। माना जाता है कि बंदरों से यह रोग इंसानों में फैला है। दरअसल अफ्रीका के लोग बंदर को खाते थे। ऐसे में यह अनुमान गलत नहीं लगता कि बंदर को खाने से वायरस ने इंसान के शरीर में प्रवेश किया होगा। डे ट्रेडर्स को कौन से लक्षण सफल बनाते हैं सबसे पहले 1920 में यह बीमारी अफ्रीका के कॉन्गो की राजधानी किंसास में फैली थी। 1959 में कांगो के एक बीमार आदमी के खून के नमूने में सबसे पहले HIV वायरस मिला था। माना जाता है कि वह पहला HIV संक्रमित व्यक्ति था। किंशास उस समय सेक्स ट्रेड का गढ़ था। इस तरह सेक्स ट्रेड और अन्य माध्यमों से यह बीमारी अन्य देशों में पहुंची।

​बाकी दुनिया में कैसे फैला?

Blood Sugar: अगर ब्लड शुगर लेवल 500 पार हो जाए तो क्या होता है? जानिए फौरन कंट्रोल करने के उपाय

Blood Sugar: अगर ब्लड शुगर लेवल 500 पार हो जाए तो क्या होता है? जानिए फौरन कंट्रोल करने के उपाय

जानिए हाई ब्‍लड शुगर को कैसे करें कंट्रोल (फोटो-Freepik)

डायबिटीज की समस्‍या आम हो चुकी है। यह भारत में अन्‍य देशों की अपेक्षा तेजी से फैली है। डायबिटीज (Diabetes) एक ऐसी बीमारी है, जिससे हाई ब्‍लड शुगर और इंसुलिन कम हो जाता है। हाई ब्‍लड शुगर शरीर के लिए बिल्‍कुल भी सहीं नहीं माना जाता है, यह शरीर में कई गंभीर बीमारियों को जन्‍म देता है। आइए जानते हैं अगर ब्‍लड शुगर 500 या 500 के पार चला जाए तो क्‍या करना चाहिए, इसके लक्षण और बचाव।

हाई ब्लड शुगर क्या है?
हाई ब्लड शुगर को हाइपरग्लेसेमिया के रूप में भी जाना जाता है। हाई ब्‍लड शुगर टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज वाले मरीजों को प्रभावित करता है। इसके बढ़ने से शरीर में कई तरह की समस्‍याएं पैदा हो जाती है। इससे हार्ट अटैक का भी खतरा बढ़ जाता है।

Blood Sugar: अगर ब्लड शुगर लेवल 500 पार हो जाए तो क्या होता है? जानिए फौरन कंट्रोल करने के उपाय

Blood Sugar: अगर ब्लड शुगर लेवल 500 पार हो जाए तो क्या होता है? जानिए फौरन कंट्रोल करने के उपाय

जानिए हाई ब्‍लड शुगर को कैसे करें कंट्रोल (फोटो-Freepik)

डायबिटीज की समस्‍या आम हो चुकी है। यह भारत में अन्‍य देशों की अपेक्षा तेजी से फैली है। डायबिटीज (Diabetes) एक ऐसी बीमारी है, जिससे हाई ब्‍लड शुगर और इंसुलिन कम हो जाता है। हाई ब्‍लड शुगर शरीर के लिए बिल्‍कुल डे ट्रेडर्स को कौन से लक्षण सफल बनाते हैं भी सहीं नहीं माना जाता है, यह शरीर में कई गंभीर बीमारियों को जन्‍म देता है। आइए जानते हैं अगर ब्‍लड शुगर 500 या 500 के पार चला जाए तो क्‍या करना चाहिए, इसके लक्षण और बचाव।

हाई ब्लड शुगर क्या है?
हाई ब्लड शुगर को हाइपरग्लेसेमिया के रूप में भी जाना जाता है। हाई ब्‍लड शुगर टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज वाले मरीजों को प्रभावित करता है। इसके बढ़ने से शरीर में कई तरह की समस्‍याएं पैदा हो जाती है। इससे हार्ट अटैक का भी खतरा बढ़ जाता है।

Irregular Periods: अनियमित पीरियड्स हो सकते हैं गंभीर बीमारियों के लक्षण, जानिए कब डॉक्टर से लेनी चाहिए सलाह

Irregular Periods: अनियमित पीरियड्स हो सकते हैं गंभीर बीमारियों के लक्षण, जानिए कब डॉक्टर से लेनी चाहिए सलाह

Irregular periods: देर से आते हैं पीरियड्स तो डे ट्रेडर्स को कौन से लक्षण सफल बनाते हैं हल्के में ना लें (Image: canava)

What Are Irregular Periods: पेट दर्द, पैरों में दर्द, उल्टी, चक्कर आना और अनियमित पीरियड्स आपको कई गंभीर बीमारियों की ओर इशारा कर सकते हैं। आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर लड़कियों को अनियमित पीरियड्स (Irregular periods symptoms) की समस्या होती है। अनियमित पीरियड्स शरीर में कई तरह की समस्याएं पैदा कर देते हैं। इसलिए, अगर आपको भी नियमित डे ट्रेडर्स को कौन से लक्षण सफल बनाते हैं पीरियड्स नहीं हो रहे हैं तो आपको चिंता करने की जरूरत है। करीब 14 से 25 फीसदी महिलाएं अनियमित डे ट्रेडर्स को कौन से लक्षण सफल बनाते हैं पीरियड्स (What causes menstrual irregularities?) की समस्या से जूझ रही हैं।

​बाकी दुनिया में कैसे फैला?

1960 में यह बीमारी अफ्रीका से हैती और कैरिबियाई द्वीप में फैली। दरअसल औपनिवेशिक लोकतांत्रिक गणराज्य कॉन्गो में हैती के लोग काम करते थे। उन्होंने स्थानीय स्तर पर शारीरिक संबंध बनाए जिससे उनमें यह बीमारी फैली। जब वे अपने घरों को लौटे तो वायरस उनके साथ हैती पहुंचा। उसके बाद वायरस कैरिबिया से न्यू यॉर्क सिटी में 1970 के दौरान फैला और फिर अमेरिका से बाकी दुनिया में पहुंचा।

​यूं हुई एड्स की पहचान

​यूं हुई एड्स की पहचान

1981 में एड्स की पहचान हुई। लॉस एंजेलिस के डॉक्टर माइकल गॉटलीब (michael gottlieb) ने पांच मरीजों में एक अलग किस्म का निमोनिया पाया। इन सभी मरीजों में रोग से लड़ने वाला तंत्र अचानक कमजोर पड़ गया था। ये पांचों मरीज समलैंगिक थे, इसलिए शुरुआत में डॉक्टरों को लगा कि यह बीमारी केवल समलैंगिकों में ही होती है। इसीलिए एड्स को ग्रिड यानी, गे रिलेटिड इम्यून डेफिशंसी का नाम दिया गया। बाद में डे ट्रेडर्स को कौन से लक्षण सफल बनाते हैं डे ट्रेडर्स को कौन से लक्षण सफल बनाते हैं जब दूसरे लोगों में भी यह वायरस मिला तो पता चला कि यह धारणा गलत है। 1982 में पहली डे ट्रेडर्स को कौन से लक्षण सफल बनाते हैं बार सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रल ऐंड प्रिवेंशन, अमेरिका (Centers for Disease Control and Prevention) ने इस बीमारी के लिए AIDS टर्म का इस्तेमाल किया।

​भारत में पहला मामला

​भारत में पहला मामला

भारत में साल 1986 में एड्स का पहला मामला सामने आया डे ट्रेडर्स को कौन से लक्षण सफल बनाते हैं था। इसके पीछे डॉ.सुनीति सोलोमन और उनकी छात्रा डॉ.सेल्लप्पन निर्मला का योगदान था। निर्मला ने चेन्नई, तमिलनाडु डे ट्रेडर्स को कौन से लक्षण सफल बनाते हैं की महिला सेक्स वर्करों के खून का नमूना इकट्ठा किया और उसकी जांच की। उस समय निर्मला और सोलोमन डे ट्रेडर्स को कौन से लक्षण सफल बनाते हैं को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। जब उन्होंने बीमारी फैलने का खुलासा किया तो लोगों के निशाने पर आ गए। उनकी जांच पर सवाल खड़े किए गए।

​वायरस की पहचान

​वायरस की पहचान

1984 में पहली बार शोधकर्ताओं ने एड्स के वायरस एचआईवी की पहचान की। 1983 में फ्रांस के पाश्चर इंस्टिट्यूट के दो वैज्ञानिक, ल्यूक मॉन्टेगनियर और फ्रैंकोइस बर्रे सिनूसी ने एड्स से ग्रसित रोगी के सूजी हुई लिम्फ ग्रंथि से एक वायरस की खोज की, जिसे उन्होंने एलएवी (lymphadenopathy-associated virus) वायरस कहा। इसके एक साल बाद डे ट्रेडर्स को कौन से लक्षण सफल बनाते हैं अमेरिका के राष्ट्रीय कैंसर संस्थान (NCI) के रॉबर्ट गैलो ने एचटीएलवी III वायरस की खोज की। 1985 में पता चला कि ये दोनों एक ही वायरस हैं और एड्स फैलाते हैं। 1986 में पहली बार HTLV-III/LAV वायरस का नाम बदल कर, एचआईवी यानी ह्यूमन इम्यूनो डेफिशंसी वायरस रखा गया।

लाल रिबन और एड्स

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