टैक्स बचाने के लिए बेस्ट स्कीम

आपको कोरोना वायरस महामारी के दौरान बचत करनी चाहिए या निवेश करना चाहिए?

जैसे कि हम लॉकडाउन के तहत अपने-अपने घरों में बैठे है, दुनिया को एक कोरोना वायरस की महामारी से जूझते और लड़ते हुए देख रहे है, ग्लोबल दुनिया की अर्थव्यवस्था और शेयर बाज़ार भी भीषण सफलता को प्राप्त कर रहे है׀

Table of Contents
क्या होगा यदि हम इस कोरोना वायरस के दौरान निवेश करे?
क्या हो यदि हम इस कोरोना वायरस महामारी के दौरान बचत करें?
इस महामारी के दौरान घबराहट से कैसे बचें ?

पिछले कुछ महीनों में बाज़ार ने नये नीचले स्तरों को छुआ है׀

जैसे जितने ज्यादा राष्ट्र इस बीमारी का सामना करने कि कोशिश कर रहे है, इससे विश्व की अर्थव्यवस्था का भविष्य बहुत ही अनिश्चित और अस्थिर है׀

इन सब बातों को ध्यान में रखते हुए, एक आवश्यक प्रश्न है निवेश करते वक्त इन सबका हमेशा ध्यान रखें जो इन हालातों में हम सबके दिमाग में आता है- क्या हमें इस महामारी के दौरान बचत करनी चाहिए या निवेश करना चाहिए?

तो, वर्तमान स्थिति को देखते हुए, हमें क्या करना चाहिए?

क्या होगा यदि हम इस कोरोना वायरस के दौरान निवेश करे?

बार- बार हर समय, भारत ने दुनिया की सबसे बड़ी ग्लोबल मंदी का सामना किया है और इससे उबरा भी है׀

अब, जैसे कि हम इसके जैसी एक और स्थिति का सामना कर रहे है, हमें यह भी ध्यान में रखना चाहिए की यह समय भी निकल जाएगा׀

मार्केट एक्सपर्ट्स से सरल भाषा में शेयर बाजार सीखें और ट्रेडिंग करें

इसके साथ ही, बाज़ार में किसी भी प्रकार के निवेश से पहले, हमें बाज़ार की वर्तमान अस्थिरता को भी ध्यान में रखना होगा׀

दुनिया भर के बाज़ार इस महामारी के परिणामों का सामना करने के लिए मजबूर है जब तक कि भारत और कुछ अन्य देश आशाजनक लाभ नहीं दिखा देते׀

इसके अलावा, कुछ क्षेत्र ऐसे भी है जो इस महामारी के बाद नुकसान झेलेंगे या लाभ कमाएँगे׀

तो इसीलिए यदि आप किसी भी क्षेत्र में निवेश करने कि योजना बना रहे है, तो उपरोक्त ब्लॉग पर अवश्य एक नज़र डाले׀

क्या हो यदि हम इस कोरोना वायरस महामारी के दौरान बचत करें?

यह देखते हुए कि हम सभी एक संकट का सामना कर रहे है, इस समय पैसे की बचत करना सबसे अच्छा होगा- फिर चाहे वो आपूर्तियों के लिए हो, हॉस्पिटल के बिल के लिए या फिर हमारी सामान्य जरूरतों के लिए हो׀

जैसा की हमने पहले भी बताया है, कि किसी भी प्रकार के निवेश के लिए निर्णय लेना ठीक नहीं होगा वो भी जब आप अच्छे रिटर्न और धन-सृजन (बचत) की उम्मीद कर रहे है׀

हममें से बहुत से लोग शेयर बाज़ार को छोड़कर अपने पैसे को विभिन्न बचत योजनाओं में डाल सकते है, लेकिन यह बहुत अधिक लाभ नहीं देगा׀

इसीलिए, इस समय, यदि आप अपने पूरे धन को आपातकालीन स्थिति के लिए रखे तो बहुत ही अच्छा होगा׀

इस महामारी के दौरान घबराहट से कैसे बचें ?

कोरोना वायरस स्थिति

जैसा कि हम उपर दर्शाए गए बातों से देख सकते है, यह बात साफ़ है कि बाज़ार कि स्थिति निवेश करने के लिए जरा मुश्किल है׀

बाज़ार की यह स्थिति में यह समय सीखने और आत्मनिरिक्षण करने का है, न कि सीधे लाभ कमाने के लिए निवेश करने का׀

यदि आप एसआईपी के द्वारा बाज़ार में निवेश करते है, आपको उन्हें होल्ड पर नहीं रखना चाहिए, लेकिन यदि आपको और लिक्विड एसेट कि आवश्यकता है तो किसी भी बड़े निवेश के निर्णय को समझदारी से ध्यानपूर्वक लेने कि आवश्यकता है या हो सके तो ऐसे निर्णय लेने से बचे׀

भले ही हम अपने घरों में सुरक्षित रह रहे है, लेकिन हम इस बात को झुटला नहीं सकते की हम सभी इस समय बहुत बुरी आपातकाल स्थिति में रह रहे है׀

कोरोना वायरस में निवेश या बचत के बारे में अधिक जानने के लिए यह वीडियो देखें –

कोई फर्क नहीं पड़ता कि स्थिति कैसी है, पैसे की बचत ने हमेशा हमारे बुरे समय में हमें सहारा ही दिया है׀ और लम्बे समय में, निवेश हमेशा किसी भी महामारी कि स्थिति से उबरने में सहायता ही करेगा׀

इस प्रश्न पर कि “क्या आपको महामारी के दौरान बचत करनी चाहिए या निवेश करना चाहिए?” आपका क्या निर्णय है यह जानने में हमारी मदद करें, इस वर्तमान परिस्थिति में आप कौन सा सुझाव देंगे- बचत या निवेश?

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Stock Market Tips: शेयर बाजार में करना चाहते हैं निवेश, इन गलतियों को करने से बचें, नहीं होगा कई नुकसान

Investment Tips: कई बार निवेशक जब पैसे लगाते हैं तो उस समय मार्केट ऊपर रहता है लेकिन, उसके बाद गिरावट (Stock Market Down) के दौर पर वह बुरी तरह से घबराने लगते हैं. यह सोच बिल्कुल सही नहीं है.

By: ABP Live | Updated at : 07 Feb 2022 12:54 PM (IST)

Stock Market Investment Tips: कहते हैं कि शेयर बाजार में करोड़ों अरबों की पूंजी है लेकिन, इन पैसों को कमाना कोई आसान काम नहीं है. जब भी लोग शेयर बाजार (Share Market) में पैसे लगाने का सोचते हैं तो उनके दिमाग में यही ख्याल आता है कि वह कुछ ही दिनों में करोड़पति बन जाएंगे. लेकिन, यह सोच बिल्कुल गलत है. ज्यादातर छोटे और रिटेल निवेशक (Retail Investors in Share Market) सही तरीके से शेयर बाजार में पैसे नहीं लगाते हैं और कुछ ही दिनों में उनके पैसे डूब जाते हैं. जल्दी पैसे कमाने के चक्कर में अपनी जमा पूंजी भी गंवा देते हैं. ऐसे में यह बहुत जरूरी है कि आप सही तरीके से शेयर बाजार में पैसे लगाएं (Invest in Share Market). तो चलिए हम आपको बताते है कि रिटेल निवेशक क्या ऐसी गलतियां कर देते हैं (Mistakes Done bY retail Investors) जिसके कारण उनके पैसे डूब जाते हैं. उन्हें ऐसी गलतियों से कैसे बचना चाहिए-

1. किसी के कहने पर कभी न करें निवेश
कई बार रिटेल निवेशक बिना सही जानकारी के शेयर बाजार में निवेश कर देते (Right Information of Stock Market) हैं. इसमें ज्यादातर दूसरे के सुझाव पर निवेश करते हैं. बिना स्टॉक मार्केट को समझे (Understanding of Stock Market) पैसे लगाना बहुत बड़ी गलती साबित हो सकती है. ऐसी गलती करने से आप बिल्कुल बचें. पैसे स्टॉक मार्केट (Stock Market) को अच्छी तरह से समझें उसके बाद ही पैसे कमाने का सोचें.

2. मार्केट की गिरावट से घबरा जाना
कई बार निवेशक जब पैसे लगाते हैं तो उस समय मार्केट ऊपर रहता है. लेकिन, उसके बाद गिरावट (Stock Market Down) के दौर पर वह बुरी तरह से घबराने लगते हैं. यह सोच बिल्कुल सही नहीं है. ऐसा सोचना की आपके पैसे डूब जाएंगे बिल्कुल सही नहीं है. कई लोग नुकसान के डर से कई बार अपने शेयरों को सस्ते में बेच देते हैं. वहीं बड़े निवेशक शेयर को गिरावट के दौर में खरीदते हैं और बाद में बढ़ोतरी पर बेचते हैं. इससे उन्हें बड़ा लाभ होता है.

3. ज्यादा कमाई के चक्कर में शेयर्स को रोक कर रखना
आपको बता दें कि कई बार यह देखा गया है कि बड़े निवेशक जब शेयर्स में 5 से 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है तो वह शेयर्स को बेच देते हैं. लेकिन, छोटे निवेशक उन शेयर्स को अपने पास रखते हैं. वह ऐसा सोचते हैं कि इससे बड़ी कमाई करेंगे. बाद में उन शेयर के दाम गिरने पर उन्हें बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है. ऐसे में इस तरह की गलती करने से बचें. अगर आपके शेयर के दाम अगर 10 प्रतिशत तक भी बढ़ गए है तो उसे बेच दें.

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4. सस्ते शेयरों पर पैसा लगाना
यह अक्सर देखा गया है कि रिटेल निवेशक उन शेयर्स का चुनाव करते हैं तो सस्ते होते हैं. उन्हें लगता है कि बाद में इन शेयरों के दाम बढ़ जाएंगे. लेकिन, यह सोच बिल्कुल गलत है. कई बार निवेशक इस कारण पेनी स्टॉक (Penny Stock) में फंस जाते हैं. इससे वह अपनी जमा पूंजी भी गंवा देते हैं. हमेशा कंपनी की ग्रोथ (Company Shares) देखकर ही पैसे लगाना समझदारी भरा काम है.

5. बिना किसी एक्सपर्ट की सलाह के पैसे निवेश कर देना
पैसे निवेश करते वक्त इस बात का ध्यान रखें कि आप एक सही मार्केट एक्सपर्ट्स से सुझाव के बाद ही पैसों का निवेश करें. कई बार लोग सोशल मीडिया के बहकावे में आकर निवेश कर देते हैं. सोशल मीडिया (Social Media) पर लोग आपको लखपति-करोड़पति बनने का सपना दिखाते हैं. ऐसा करने से बिल्कुल बचना चाहिए. सही तरीके से पैसा निवेश करने से आपका पैसे डूबने का जोखिम (Loss of Money) कम हो जाता है.

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Published at : 07 Feb 2022 12:42 PM (IST) Tags: Stock Market investment tips Stock Market Tips हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें abp News पर। सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट एबीपी न्यूज़ पर पढ़ें बॉलीवुड, खेल जगत, कोरोना Vaccine से जुड़ी ख़बरें। For more related stories, follow: Business News in Hindi

SIP Investment Tips: जब नीचे जा रहा हो बाजार तो न करें ये गलती, इन बातों का भी रखें ध्यान

सिप (SIP) के जरिये म्‍यूचुअल फंड्स में निवेश करने से पहले पूरी जानकारी हासिल करनी चाहिए. अक्सर निवेशकों से कुछ गलती हो जाती है जो आगे जाकर भारी नुकसान का कारण बनती है.

By: एबीपी न्यूज़ | Updated at : 16 Aug 2021 10:54 PM (IST)

SIP Investment Tips: सिस्‍टेमैटिक इंवेस्‍टमेंट प्‍लांन यानी सिप (SIP) के जरिये म्‍यूचुअल फंड्स में बड़ी संख्या में खुदरा निवेशक पैसा बना रहे हैं. अगर आप सिप में निवेश करने के बारे में सोच रहे हैं तो पहले इसके बारे में पूरी जानकारी हासिल कर लें. क्योंकि जानकारी की कमी की वजह से कई निवेशक कुछ गलतियां कर बैठते हैं और लाभ की जगह नुकसान उठाना पड़ जाता है. आज हम आपको 5 ऐसी गलतियों के बारे में बता रहे हैं जो निवेशक अक्सर सिप में पैसा लगाते वक्त करते हैं.

वित्तीय लक्ष्य स्पष्ट न होना

  • अगर आप म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे हैं तो आपके वित्‍तीय लक्ष्य स्पष्ट होने चाहिए.
  • अगर आपके वित्तीय लक्ष्य स्पष्ट नहीं है तो आप गलत फंड चुन सकते हैं.

ग्रोथ के बजाय डिविडेंड प्‍लान चुनना

  • ग्रोथ प्‍लान के बजाय डिविडेंड प्‍लान को तरजीह देना ठीक नहीं है.
  • ऐसा करने वाले निवेशकों को लगता है कि जब म्‍यूचुअल फंड डिविडेंड की घोषणा करेगा तो उन्‍हें मोटी कमाई होगी.
  • यह बात ज्यादातर निवेशकों को नहीं पता होती कि म्‍यूचुअल फंड्स अपनी असेट्स अंडर मैनेजमेंट से ही डिविडेंड का भुगतान करते हैं. इससे भुगतान किया गया डिविडेंड एनएवी से घट जाता है. वहीं, डिविडेंड की गणना फंड की फेस वल्‍यू पर की जाती है, ना कि एनएवी के आधार पर.
  • यह बात भी ध्यान रखें कि ग्रोथ प्‍लांस में निवेशकों को टैक्‍स छूट के मामले में भी ज्‍यादा फायदा मिलता है.

बाजार जब नीचे आ रहा हो तो ये गलती न करें

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  • कई निवेशक बाजार नीचे आने पर सिप को रोक देते हैं और जब बाजार ऊपर जाता है तो निवेश शुरू करते हैं.
  • लेकिन ऐसा करना गलत है और यह निवेश के बुनियादी सिद्धांत बाय लो एंड सेल हाई के बिल्कुल उलट है. आप गिरते बाजार के समय भी निवेश जारी रखकर इस गलती से बच सकते हैं.
  • बाजार की चाल पर ध्यान न दें बल्कि निवेश अवधि के साथ मेल खाते फंड्स की कैटेगरी में इनवेस्ट करें. इस तरह, आप सही फंड चुन सकते हैं.

बार-बार बदलाव न करें

  • लगातार अपने पोर्टफोलियो में एडजस्ट न करें.
  • किसी दूसरों की देखा-देखी शेयर्स की खरीद-बिक्री न करें. ऐसा नुकसानदायक हो सकता है क्योंकि हर किसी के वित्तीय लक्ष्य और स्थितियां अलग होती हैं.
  • बहुत से लोग फंड के पिछले प्रदर्शन के आधार पर निवेश करते हैं लेकिन यह पूरी तरह सही नहीं है. हमेशा ध्यान रखें कि फंड का रिटर्न बदलता रहता है.
  • फंड का मूल्य हर तिमाही में बदलता है. फंड्स को चुनने से पहले आपको अन्य मानकों का संदर्भ भी लेना चाहिए.

कम एनएवी को ना मानें सस्‍ता फंड

  • कम एनएवी (नेट एसेट वैल्‍यू) को सस्‍ते फंड के तौर पर नहीं लेना चाहिए.
  • फंड की एनएवी ज्‍यादा या कम होने के कई कारण हो सकते हैं.
  • निवेशकों को म्‍यूअल फंड में सिप के जरिये निवेश करते समय उसकी एनएवी पर ज्‍यादा जोर न दें.
  • निवेशकों को पंड के पिछले प्रदर्शन पर ध्‍यान देना चाहिए. साथ ही उसकी भविष्‍य की योजनाओं पर फोकस करना चाहिए.

Disclaimer:

(यहां ABP News द्वारा किसी भी फंड में निवेश की सलाह नहीं दी जा रही है. यहां दी गई जानकारी का सिर्फ़ सूचित करने का उद्देश्य है. म्यूचुअल फंड निवेश बाज़ार जोखिम के अधीन हैं, योजना संबंधी सभी दस्तावेज़ों को सावधानी से पढ़ें. योजनाओं की NAV, ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव सहित सिक्योरिटी बाज़ार को प्रभावित करने वाले कारकों व शक्तियों के आधार पर ऊपर-नीचे हो सकती है. किसी म्यूचुअल फंड का पूर्व प्रदर्शन, आवश्यक रूप से योजनाओं के भविष्य के प्रदर्शन का परिचायक नहीं हो सकता है. म्यूचुअल फंड, किन्ही भी योजनाओं के अंतर्गत किसी लाभांश की गारंटी या आश्वासन नहीं देता है और वह वितरण योग्य अधिशेष की उपलब्धता और पर्याप्तता से विषयित है. निवेशकों से सावधानी के साथ विवरण पत्रिका (प्रॉस्पेक्टस) की समीक्षा करने और विशिष्ट विधिक, कर तथा योजना में निवेश/प्रतिभागिता के वित्तीय निहितार्थ के बारे में विशेषज्ञ पेशेवर सलाह को हासिल करने का अनुरोध है.)

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Published at : 16 Aug 2021 10:54 PM (IST) Tags: ABP News Mutual Funds SIP mutual fund calculator monthly sip annual sip हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़ हिंदी में सबसे पहले पढ़ें abp News पर। सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट एबीपी न्यूज़ पर पढ़ें बॉलीवुड, खेल जगत, कोरोना Vaccine से जुड़ी ख़बरें। For more related stories, follow: Business News in Hindi

एकमुश्त इन्वेस्टमेंट के बारे में वे सारी बातें जो आप सबको पता होनी चाहिए

एकमुश्त इन्वेस्टमेंट के बारे में वे सारी बातें जो आप सबको पता होनी चाहिए - स्मार्ट मनी

आप इसकी तुलना इस बात से कर सकते हैं कि जैसे आज लोग कहें "अरे, मैंने अब तक वैक्सीन नहीं लिया।" आज के दौर में यह कहने का मतलब है - 2019 में इसका शायद ही कोई मतलब होता। उस वक़्त किसी को भी वैक्सीन नहीं लगा था। लेकिन अब क्योंकि लोग वैक्सीन लगवा रहे हैं इसलिए कोई यह कह सकता है कि उसे वैक्सीन नहीं लगा है।

जब आप एकमुश्त इन्वेस्ट करते हैं, तो आपकी मंशा पूरी उपलब्ध पूंजी इन्वेस्ट करने की होती है। इसके उलट है एसआईपी, जिसमें आप किसी म्यूचुअल फंड में नियमित अंतराल पर तय राशि इन्वेस्ट करते हैं। एकमुश्त इन्वेस्टमेंट पारंपरिक इन्वेस्टमेंट जैसे सोना, रियल एस्टेट, फिक्स्ड डिपॉजिट और म्यूचुअल फंड दोनों में होता है। हालांकि एसआईपी विशिष्ट रूप से म्यूचुअल फंड में होता है।

आपको एकमुश्त कब इन्वेस्ट करना चाहिए?

  1. जब आपके हाथ में बड़ी पूंजी हो।
    जैसे बस अभी-अभी आपको सालाना बोनस मिला हो या विरासत में कुछ मिला हो? या हो सकता है आपका कोई दूसरा इन्वेस्टमेंट मैच्योर हो गया हो? इस पैसे को तुरंत म्यूचुअल फंड लगाना जायज़ है। लेकिन जब आपकी पूंजी बचत खाते से जुड़ी हो तो संभावित कमाई गंवाने का कोई कोई मतलब नहीं है। एसआईपी का ज़रिया अपनाने का मतलब है म्यूचुअल फंड की यूनिट की लगत को एवरेज आउट करना जिनमें रोज़ाना उतार-चढ़ाव होता है। भले ही आप अपनी यूनिट के लिए शायद अधिक कीमत का भुगतान करते हैं लेकिन बहुत गुंजाइश होती है कि इससे आपको बचत खाते से मिलने वाले कम ब्याज के मुकाबले बेहतर आमदनी हो।
  2. यदि आप एसआईपी के लिए मासिक बचत अलग नहीं रख सकते
    तो आप शायद वैसे व्यक्ति हैं जो हर महीने बचत के लिए प्रतिबद्ध नहीं हो सकते। आपने कुछ महीने तो कुछ पूंजी अलग रख ली लेकिन प्रतिबद्ध नहीं हो सके। या फिर शायद आपकी कमाई अनिश्चित है। ऐसे मामले में, एकमुश्त इन्वेस्टमेंट का विकल्प चुनना समझदारी हो सकती है।
  3. यदि आपको टैक्स-सेविंग इन्वेस्टमेंट करने में देर हो जाती है,
    यदि फरवरी आ गई है और आपने अब तक 31 मार्च को समाप्त होने वाले वित्त वर्ष के लिए 80सी के तहत इन्वेस्टमेंट नहीं किया हो तो आपके पास एसआईपी के लिए समय नहीं होता है (हालाँकि कुछ म्यूचुअल फंड साप्ताहिक एसआईपी की सुविधा देते हैं)। ऐसे में आप एकमुश्त इन्वेस्टमेंट के जरिए अपने टैक्स-सेविंग म्यूचुअल फंड का विकल्प चुन सकते हैं। इन टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड को इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम के रूप में जाना जाता है - ये आपकी पूंजी को तीन साल के लिए लॉक-इन करते हैं और आपको आयकर अधिनियम की धारा 80सी के तहत 1,50,000 रुपये तक का टैक्स बेनिफिट देते हैं। आप आमतौर पर एसआईपी या एकमुश्त तरीके से इन्वेस्ट कर सकते हैं लेकिन यदि आपको इन्वेस्टमेंट में देर हो रही है तो आपको टैक्स भरने की समय सीमा तक एकमुश्त इन्वेस्टमेंट करना चाहिए।

एकमुश्त इन्वेस्ट करते समय ध्यान रखने लायक मुख्य बातें

1. अपने इन्वेस्टमेंट पर खूब मुनाफा कमाना

हमने पहले बात की कि एसआईपी का रास्ता अख्तियार करने का मतलब है म्यूचुअल फंड की यूनिट की लागत को एवरेज आउट करना जिनमें रोज़ाना उतार-चढ़ाव होता है। ऐसा इसलिए है कि म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करने पर आप उस म्यूचुअल फंड की यूनिट खरीदते हैं। तो मान लीजिए कि आपके पास इन्वेस्ट करने के लिए 10,000 रुपये हैं। तो आपको उस राशि में उपलब्ध यूनिट मिलेंगी। मान लें कि किसी म्यूचुअल फंड की यूनिट की कीमत 50 रुपये है; आपको अपनी 10,000 रुपये की पूंजी में 200 यूनिट मिलेंगी। हालांकि, यूनिट की कीमतें रोज़ाना बदलती रहती हैं और आपकी आय इस पर निर्भर करती है कि जब आप अपनी सारी यूनिट बेच रहे हैं तो उस उक्त कीमत में कितना अंतर होता है।

साफ़ है कि आप हर संभव बड़ा अंतर बनाए रखना चाहते हैं और इसलिए कम से कम कीमत पर खरीदारी करना ज़रूरी है। इन्वेस्टर एसआईपी के ज़रिये अपनी खरीद को एवरेज आउट करने की कोशिश करते हैं। जब आप एकमुश्त राशि इन्वेस्ट करते हैं तो आप उस एवरेजिंग की संभावना का फायदा नहीं उठा पाते हैं। हालाँकि, आप इससे दो तरह से निपट सकते हैं।

  1. इन यूनिट की ऐतिहासिक कीमत पर थोड़ा होमवर्क करें और जब बाज़ार नीचे हो उस समय खरीदारी करेंI
  2. अपनी पूंजी को एक ऐसे लिक्विड फंड में डालें जिसमें आमतौर पर कम उतार-चढ़ाव होता हो और फिर एक सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लान हो तो इससे म्यूचुअल फंड में आपकी खरीद को ज़्यादा रिस्क-रिवॉर्ड रेशियो मिलता है।

मौजूदा हालात में अपने सारे फंडों को जोड़ने से पहले यह सुनिश्चित करना समझदारी होगी कि आपने अपने रोज़मर्रा के खर्च और जीवन शैली को बरकरार रखने के लिए पर्याप्त पूंजी अलग रखें। आप अपने इन्वेस्ट को अनुचित समय पर भुनाना नहीं चाहते हैं क्योंकि इससे शायद नुकसान हो सकता है (यदि आपको ऐसे समय में अपनी पूंजी निकालने की ज़रुरत पड़ती है जब बाजार नीचे होता है)। म्यूचुअल फंड में जोखिम आमतौर पर लंबी अवधि में ख़त्म हो जाता है और इसलिए आपकी इन्वेस्टमेंट योजना भी लम्बे समय के लिए होनी चाहिए। इसके अलावा कुछ निवेश करते वक्त इन सबका हमेशा ध्यान रखें किस्म के म्यूचुअल फंड भी लॉक-इन अवधि के साथ आते हैं।

चाहे आप एकमुश्त इन्वेस्ट करना चुनें या एसआईपी इन्वेस्टमेंट, ध्यान रखें हाउस और जिन स्टॉक में म्यूचुअल फंड में इन्वेस्ट करते हैं, उन पर रिसर्च करते समय सावधानी बरतें और यह देख लें कि आपकी जोखिम सह पाने की क्षमता और फंड हाउस का जोखिम प्रोफ़ाइल एक दूसरे से मेल खाता है या नहीं। म्युचुअल फंड कम जोखिम या ज़्यादा जोखिम वाला हो सकता है लेकिन शेयर बाजार से जुड़े होने के कारण कुछ हद तक जोखिम हमेशा रहेगा। हालांकि, उनकी लोकप्रियता उनके रिस्क-रिवॉर्ड बेनिफिट पर निर्भर करती है। यदि ठीक से चुना गया तो म्यूचुअल फंड से अच्छी कमाई होती है।

हमेशा याद रखें, इन्वेस्ट कोई भी कर सकता है चाहे उम्र, जेंडर या प्रोफेशन कोई भी हो। एंजेल ब्रोकिंग के साथ अपना इन्वेस्टमेंट सफ़र शुरू करें - यहाँ आपको न केवल इन्वेस्टमेंट मंच मिलता है, बल्कि यह पोस्ट जो आप अभी पढ़ रहे हैं उसकी तरह इन्वेस्टर एजुकेशन से जुड़े ढेरों पोस्ट मिलेंगे। हैप्पी इन्वेस्टिंग!

टैक्स बचाने के लिए इन योजनाओं में करें निवेश, अभी भी है समय

आम लोगों की मदद के लिए सरकार कई तरह की टैक्स सेविंग स्कीम चलाती है जिनमें पैसे जमा कर टैक्स बचा सकते हैं और फायदा उठा सकते हैं. लेकिन बचत का ज्यादातर फायदा तभी मिलता है जब उसे वित्तीय वर्ष की शुरुआत या बजट के ठीक बाद शुरू कर दें.

टैक्स बचाने के लिए बेस्ट स्कीम

टैक्स बचाने के लिए बेस्ट स्कीम

gnttv.com

  • नई दिल्ली ,
  • 29 जनवरी 2022,
  • (Updated 29 जनवरी 2022, 9:13 PM IST)

सरकार कई तरह की टैक्स सेविंग स्कीम चलाती है जिनमें इन्वेस्टमेंट कर टैक्स बचा सकते हैं.

इनकम टैक्‍स बचाने के लिए PPF सबसे अच्‍छी सरकारी स्‍कीम है.

भविष्य की चिंता हर किसी को होती है. अपने फ्यूचर को ध्यान में रखकर ही ज्यादातर लोग नौकरी और बचत करते हैं. हर महीने सैलरी आने तक तो जीवन की गाड़ी आराम से चलती रहती है, पर दिक्कत आती है टैक्स सेविंग के समय. ऐसे में सरकारी हो या प्राइवेट कर्मचारी, महिला हो या पुरुष, सभी को सैलरी पैकेज के साथ-साथ टैक्स सेविंग पर ध्यान देना भी बहुत जरूरी है. ऐसे में कमाई के साथ ही बचत को भी अच्छे से प्लान किया जाए ताकि बाद में किसी तरह की कोई समस्या ना हो. ऐसे में भविष्य को ध्यान में रखते हुए ऐसी कई स्कीम हैं जहां टैक्स बचाने के साथ कमाई की जा सकती है. आइए जानते हैं निवेश करते वक्त इन सबका हमेशा ध्यान रखें ऐसी ही कुछ पॉपुलर स्कीम के बारे में.

इन टैक्स सेविंग स्कीम के बारे में जानना इसलिए भी जरूरी है क्योंकि बचत का ज्यादातर फायदा तभी मिलता है जब उसे वित्तीय वर्ष की शुरुआत या बजट के ठीक बाद शुरू कर दें. आम लोगों की मदद के लिए सरकार कई तरह की टैक्स सेविंग स्कीम चलाती है जिनमें पैसे जमा कर टैक्स बचा सकते हैं और फायदा उठा सकते हैं. ये स्कीम अच्छा रिटर्न भी देती हैं. इन स्कीम में ELSS, NPS और NSC शामिल हैं.

नेशनल पेंशन स्कीम

भारत सरकार की ओर से चलाई जाने नेशनल पेंशन स्कीम में कोई भी नौकरीपेशा व्यक्ति लंबे समय के लिए निवेश कर सकता है. इस स्कीम में सरकारी से लेकर प्राइवेट सेक्टर के सभी कर्मचारी निवेश कर सकते हैं. इसके बाद रिटायरमेंट के वक्त आपको एक साथ बड़ा फंड मिलेगा. इसके साथ ही हर महीने आपको कुछ पेंशन राशि भी सरकार देगी. NPS में कोई भी केंद्रीय कर्मचारी, राज्य सरकार का कर्मचारी, प्राइवेट सेक्टर कर्मचारी और आम नागरिक निवेश कर सकता है. कोई भी भारतीय जिसकी उम्र 18-65 साल है, वह एनपीएस में निवेश कर सकता है.

नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट

NSC एक फिक्स्ड इनकम टैक्स सेविंग इन्वेस्टमेंट प्लान है जिसे किसी भी पोस्ट ऑफिस में खोला जा सकता है. यह एक सरकारी स्कीम है. एनएससी में सालाना 6.8 परसेंट ब्याज मिलता है. इस स्कीम में दो तरह के सर्टिफिकेट 5 साल और 10 साल के लिए दिए जाते हैं. NSC में सेक्शन 80C के तहत 1.50 लाख रुपये जमा पूंजी पर टैक्स बचा सकते हैं.

पब्लिक प्रोविडेंट फंड

इनकम टैक्‍स बचाने के लिए PPF सबसे अच्‍छी सरकारी स्‍कीम है. आप पीपीएफ अकाउंट में 500 रुपये से लेकर 1.निवेश करते वक्त इन सबका हमेशा ध्यान रखें 5 लाख रुपये तक इंवेस्ट कर सकते हैं. फिलहाल सरकार पीपीएफ पर 7.10 प्रतिशत की सालाना दर से ब्याज दे रही है. पीपीएफ की न्यूनतम अवधि 15 साल होती है और अकाउंट खोलने के लिए कम से कम 500 रुपये जमा करने होते हैं. पीपीएफ अकाउंट को पोस्ट ऑफिस या किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में शुरू कर सकते हैं.

म्यूचुअल फंड

ईएलएसएस म्यूचुअल फंड या इक्विटी लिंक्ड म्यूचुअल फंड का पैसा इक्विटी फंड में निवेश किया जाता है. इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत निवेशकों को इस म्यूचुअल फंड में निवेश पर टैक्स में छूट मिलती है. इसमें 1.5 लाख रुपये की पूंजी पर टैक्स कटौती का फायदा उठा सकते हैं. ELSS में इंवेस्टमेंट और टैक्स सेविंग दोनों का फायदा मिलता है.

फिक्स्ड डिपॉजिट

टैक्स बचाने के लिए FD में निवेश करना एक शानदार विकल्प है. अगर आप टैक्स बचाने के लिए एफडी कर रहे हैं तो इस बात का खास ध्यान रखें कि इसके लिए 5 साल का लॉक इन पीरियड निर्धारित है. टैक्स सेविंग के लिए की जाने वाली एफडी की रकम को मैच्योरिटी यानी 5 साल से पहले नहीं निकाला जा सकता है. एफडी पर मिलने वाली ब्याज दर में हमेशा बदलाव होता रहता है.

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